| ekumaon.com में आपका स्वागत है | अब ओरकुट की सुबिधा ई कुमाऊँ पर कुमाऊँ शब्द की उत्पति के सम्बन्ध मैं बिभिन्न मत हैं अलग-अलग बिद्वानो के अलग मत हैं| जिनके संबंध में मान्यता है कि भगवान विष्णु अपने द्वितीय अवतार (कूर्मावतार) में इस पर्वत पर तीन वर्ष तक रहे। तब से वह पर्वत कांतेश्वर के स्थान पर कूर्म-अंचल (कूर्मांचल) नाम से जाना जाने लगा। इस पर्वत की आकृति भी कच्छप की पीठ जैसी जान पड़ती है। जिससे अनुमान लगाया जाता है की इसी कारण इस क्षेत्र का नाम कूर्मांचल पड़ा होगा। कालान्तर में साहित्यिक ग्रन्थों, ताम्रपत्रों में कुमूँ के स्थान पर कुमऊ और उसके बाद कुमाऊँ शब्द स्वीकृत हुआ। संस्कृत ग्रन्थों में भी कूर्मांचल शब्द का प्रयोग मिलता है। विस्तृत जानकारी ....... कुमाऊँ की संस्कृतिएक प्रदेश की संस्कृति ही उस प्रदेश को अन्य प्रदेश के मध्य उसका अस्तित्व स्पष्ट करती है| बोलचाल, पहनावा, त्योंहार एवं धार्मिक रीति-रिवाज से उसकी भिन्नता स्पष्ट की जाती है| पद्लते परिवेश मैं जहाँ पाश्चात्य सभ्यता का बोलबाला हो रहा है, वहीं आज भी कुमाऊँ मंडल अपनी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को संजोये हुए है| आज भी प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक कुमाऊँ की संस्कृति की एक झलक पाने के लिए विशेष पर्वों पर यहाँ आते हैं एवं मनोरंजन करते हैं| कुमाऊँ का मुख्य पहनावा पुरूष कुरता पाजामा एवं महिलाएं साड़ी एवं ब्लाउज पहनती है| विशेष पर्वों में महिलाएं नाक मैं नाथ एवं पिछोड़ पहनती हैं| यहाँ की मुख्य बोली कुमाऊँनी (पहाडी) है| यहाँ की मुख्य पर्वों मैं फुल्दै, बिखौती, हरेला, घी सक्रांति, खातोरुआ, बसंत पंचमी इत्यादी हैं| धार्मिक दृष्टि से कुमाऊँ मंडल मैं विभिन्न देवी देवताओं को मानते हैं| जिनमे उनकी बहुत ही श्रद्धा है एवं प्रतिवर्ष वे अपने देवताओं के पूजन का आयोजन करते हैं तथा अपने विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं| कुमाऊँ के प्रमुख देवताओं मैं गोलू, भूमिया, नरशिंग, काल बिष्ट, क्त्युर इत्यादी हैं| विस्तृत जानकारी ....... कुमाऊँ पर्यटन कुमाऊँ उत्तरांचल प्रदेश एक मुख्य क्षेत्र है| इस भाग मैं अल्मोरा, नैनीताल, पिथोरागढ़, बागेश्वर, चम्पावत, और उधमसिंह नगर छः जिले हैं, जिनका पर्यटन की दृष्टि से अपना अलग ही इतिहासिक महत्व है| जगेश्वर, पुर्नागिरी, नंदादेवी, नैथना देवी, पंडू खोली, दुनागिरी, मासी का भूमिया चितई का गोलू, प्रमुख धार्मिक मन्दिर हैं जहाँ देश-विदेशों से लाखों श्रद्धालु दर्शनार्थ आते हैं| कुमाऊँ हिमालय के मध्य मैं स्थित है पूर्व मैं काली नदी, पश्चिम मैं गढ़वाल स्थित है| यहाँ का हवाई अड्डा पन्त नगर मैं है, जहाँ से नियमित उड़ने दिल्ली, कोल्कता और लखनऊ शेष भारत को जोड़ता है| अन्य प्रांतों के लिए टेक्सी एवं बस ले सकते हैं| यहाँ का प्रमुख रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जो की लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, चेंनेई एवं अन्य भारत के प्रमुख शहरों को जोड़ता है| विस्तृत जानकारी ....... | |
|